गुरु पर्व
घेरा डाला चमकौर में है ,
मुग़लों की फौजो ने।
जहाँ उपस्थित गुरु जी गोविन्द जी ,
सँग शिष्य के घेरे में।।
दस लाख फौजे सुल्तानी ,
चमक रही शमशीरे है।
हर ओर से घिरती आ आती ,
जम कर शौर मचाती आती ।।
अंदर का अद्भुत मन्जर है ,
मित्रो सुनो कलम से आज ।
चिड़िया दे नाल बाज लड़वा
गीदड़l नू में शेर वनावा
सवा लाख ते इस लड़वा
ता गोविन्द सिंह नाम कहावा।।
जो बोले सो निहाल स्सतिर्यकाल
गूँज सुनी है सिंहों की दहशत में है मुगल पठान।
रण में साहिब जादे है उतरे उतरे सिंह वीर बलबान ।
पंथ की खातिर आज लड़े है,
लड़े आन की खातिर है ,
देने को बलिदान चले है ,
लड़े हिन्द की खातिर है।।
वीर है उतरे रण में ऐसे ,
अम्बर रहा बाज रहराये।।
मारत जावे काटत जावे ,
वीरगति को पावत जाये।।
रण में उतरे साहिब जादे,
दोनों गये वीरगति पाये।।
किंतु वीरो की माँ को देखो ,
अश्क नही एक बाहाए।।
हिन्द की खातिर माओ ने
देखो है अपने लाल लुटाएं।।
अंतिम पांच बचे तो दीना,
पंच प्यारो ने ये आदेश ।।
अभी करे प्रस्थान है गुरुवर,
आप सलामत पंथ सलामत,
युग युग से गाते ये वाणी ,
कलम वीर साधु और सन्त।
किले के भीतर घुस आई है,
अब मुगलो की फौजे है ।
भेष गुरु का धार लड़े है ,
अंतिम सिंह करे तलवार।
रक्त रंजित सब के है सीने,
होने लगे बार पर बार।
जीत के भी हारा बजीर खां,
उस को मन में रहा मलाल।
गौरवशाली इतिहासो के ,
पन्नो पे हम को है नाज।
अमर लिखे ग़ोपाल ये गाथा,
नमन करें वीरो का आज ।।
Goapl Gupta Gopal
madhura
04-Jul-2023 06:00 AM
Awesome post
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hema mohril
03-Jul-2023 04:02 PM
Very nice
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